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कंधे के दर्द का तेल

कंधे का दर्द रोजमर्रा के छोटे कामों में पकड़ में आता है। अलमारी से ऊपर का डिब्बा उतारना, पीछे से कुर्ता खींचना, गाड़ी में सीट बेल्ट लगाना। कई बार कोई चोट भी नहीं लगी होती — कंधा अपने आप दुखने लगता है और फिर धीरे-धीरे हिलना कम हो जाता है।

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Dr. Granny's Magic™ आयुर्वेदिक तेल — कंधे का दर्द के लिए
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कंधे का दर्द — छोटा जवाब

कंधे के दर्द के लिए Dr. Granny's Magic की 5–10 ml मात्रा गर्म करके कंधे के सामने, ऊपर और बाहरी बांह पर 3–5 मिनट धीरे-धीरे गोलाकार मालिश करें, दिन में दो बार। मालिश करते समय हाथ को गोद में ढीला छोड़ें, ऊपर उठाकर न रखें। अगर फिजियोथेरेपी चल रही है तो स्ट्रेचिंग से पहले लगाएं, जब कंधा गर्म हो। पूरे भारत में Cash on Delivery — mukorossi.in पर।

कंधा जकड़ता क्यों है

कंधे का जोड़ एक झिल्ली जैसी थैली के अंदर होता है। कुछ लोगों में यह थैली मोटी और सख्त हो जाती है और उसके अंदर कसाव आ जाता है। इसे अंग्रेजी में फ्रोजन शोल्डर कहते हैं। इसमें जोड़ किसी हड्डी से नहीं रुकता — आसपास की सिकुड़ी हुई झिल्ली उसे रोकती है, इसलिए हरकत एक जगह जाकर सख्ती से रुक जाती है।

यह करीब हर 100 में 2 से 5 लोगों में होता है, ज्यादातर 40 से 60 की उम्र में, और महिलाओं में कुछ ज्यादा। जिन लोगों को डायबिटीज या थायरॉइड की तकलीफ है, उनमें यह काफी अधिक देखा जाता है।

तीन दौर, और हर दौर में अलग तरीका

कंधे की यह तकलीफ एक जैसी नहीं रहती। यह तीन दौर से गुजरती है, और हर दौर में मालिश का तरीका थोड़ा बदल जाता है। पूरा चक्र हफ्तों का नहीं, महीनों का होता है।

  • पहला दौर — दर्द सबसे ज्यादा। आराम करते समय भी दुखता है और रात में नींद टूटती है। इस दौर में मालिश बहुत हल्की रखें। मकसद गर्माहट है, खिंचाव नहीं।
  • दूसरा दौर — दर्द कम, जकड़न सबसे ज्यादा। कंधा जाम जैसा लगता है। स्ट्रेचिंग से पहले मालिश करें ताकि हिस्सा गर्म हो।
  • तीसरा दौर — हरकत धीरे-धीरे लौटती है। यहीं लोग जल्दी छोड़ देते हैं क्योंकि दर्द जा चुका होता है, और कंधा फिर जकड़ जाता है।

आयुर्वेद का नजरिया

आयुर्वेद कंधे की इस तकलीफ को अपबाहुक कहता है और इसे वात से जुड़ा मानता है। इसका पारंपरिक प्रबंधन स्नेहन यानी गर्म तेल लगाना और हल्की हरकत है।

Dr. Granny's Magic में निर्गुंडी, यूकेलिप्टस और गंधपूरा तिल तथा सरसों के तेल के आधार के साथ हैं — कंधे के लिए यही पारंपरिक संयोजन है।

फिजियोथेरेपी की जगह नहीं, साथ में

कंधे की हरकत लौटाने का काम हरकत ही करती है। फिजियोथेरेपी और रोज की स्ट्रेचिंग असली काम करती है। तेल की मालिश उस काम को सहने लायक बनाती है, और यह छोटी बात नहीं है — कंधे की रिकवरी सबसे ज्यादा इसलिए अटकती है कि लोग व्यायाम बीच में छोड़ देते हैं।

क्रम यह रखें — पहले तेल, फिर स्ट्रेचिंग। पांच मिनट की गर्म मालिश, उसके बाद वे व्यायाम जो आपके फिजियोथेरेपिस्ट ने बताए हैं।

कंधे पर तेल लगाने का तरीका

  1. 1

    बैठ जाएं और हाथ को गोद में ढीला छोड़ दें। मालिश करते समय हाथ ऊपर उठाकर न रखें — इससे वही मांसपेशियां तन जाती हैं जिन्हें ढीला करना है।

  2. 2

    5–10 ml तेल हथेलियों में रगड़कर गर्म करें।

  3. 3

    कंधे के सामने, हंसली की हड्डी के नीचे से शुरू करें। उंगलियों से धीरे-धीरे गोले बनाएं, करीब एक मिनट।

  4. 4

    फिर कंधे के ऊपर से बाहरी बांह की तरफ आएं। यहां दो मिनट, धीरे और हल्के हाथ से।

  5. 5

    आखिर में पीठ के ऊपरी हिस्से और कंधे के ब्लेड तथा रीढ़ के बीच जहां तक हाथ जाए, वहां मालिश करें। न पहुंचे तो घर के किसी सदस्य से करवा लें।

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    पांच मिनट सोखने दें, फिर जब हिस्सा गर्म हो तब स्ट्रेचिंग करें।

  7. 7

    रात को दोबारा लगाएं। बहुत लोग बताते हैं कि शाम की मालिश के बाद नींद बेहतर आती है।

केवल बाहरी उपयोग के लिए। संवेदनशील त्वचा हो तो पहली बार से पहले कलाई पर थोड़ा लगाकर देख लें।

बोतल में क्या है

तिल और सरसों के तेल के आधार में शास्त्रीय आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां।

Eucalyptus Oil (Nilgiri Tel)

Contains 1,8-cineole, studied for its cooling sensation and ability to ease the perception of muscle and joint discomfort when applied topically.

Sesame Oil (Til Tel)

Classical Ayurvedic carrier oil. Research suggests topical sesame oil massage may help reduce the severity of pain in limb trauma and support skin nourishment.

Smilax China (Chob Chini)

Traditionally used in Ayurveda for joint comfort. Phytochemical studies show anti-inflammatory and antioxidant activity attributed to its steroidal saponins.

Ashwagandha (Withania somnifera)

Adaptogenic herb with documented anti-inflammatory properties. Clinical reviews support its use for easing joint stiffness and improving musculoskeletal comfort.

Neem Oil

Rich in nimbidin and fatty acids. Research indicates topical neem may soothe irritated skin and supports its traditional use over sore joints.

Peppermint

Menthol in peppermint oil produces a cooling effect that activates skin TRPM8 receptors, providing fast-acting relief sensation when massaged onto sore muscles.

पूरी सामग्री देखें

डॉक्टर से मिलें अगर

  • कंधे का दर्द गिरने या झटका लगने के बाद शुरू हुआ हो
  • हाथ बिल्कुल न उठ रहा हो, या जवाब दे रहा हो
  • जोड़ पर सूजन, लाली या गर्मी हो
  • कंधे के दर्द के साथ बुखार हो
  • हाथ से होकर उंगलियों तक सुन्नपन या झनझनाहट जा रही हो

मालिश का तेल रोज के आराम के लिए है। यह जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है, और किसी रोग की पहचान या इलाज के लिए नहीं है।

आम सवाल

कंधे के दर्द के लिए कौन सा तेल अच्छा है?

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तिल और सरसों के तेल के आधार पर बना तेल जिसमें निर्गुंडी, यूकेलिप्टस और गंधपूरा हों, कंधे की जकड़न के लिए भारतीय घरों में सबसे आम पसंद है। Dr. Granny's Magic इसी तरह बना है।

कंधा ठीक होने में कितना समय लगता है?

+

यह हफ्तों की नहीं, महीनों की तकलीफ है और तीन दौर से गुजरती है। आप किस दौर में हैं और आगे क्या उम्मीद रखें, यह आपका हड्डी का डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट बता सकता है।

क्या मालिश फिजियोथेरेपी की जगह ले सकती है?

+

नहीं। हरकत लौटाने का काम फिजियोथेरेपी और नियमित स्ट्रेचिंग करती है। तेल की मालिश आराम में मदद करती है जिससे व्यायाम जारी रखना आसान होता है। दोनों साथ करें।

जकड़न तोड़ने के लिए जोर से मालिश करूं?

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नहीं। दुखते कंधे पर ज्यादा दबाव मांसपेशियों को और तान देता है और अगला दिन खराब होता है। धीरे, हल्के, गर्म और नियमित — यह जोर से बेहतर काम करता है।

मुझे डायबिटीज है, क्या लगा सकता हूं?

+

यह सिर्फ बाहरी उपयोग के लिए है और खाने की दवाओं से इसका कोई टकराव नहीं है। डायबिटीज वालों में कंधे की यह तकलीफ ज्यादा होती है, इसलिए अपने डॉक्टर को बता दें कि आप कोई तेल लगा रहे हैं।

क्या घर का कोई सदस्य लगा सकता है?

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हां, और पीठ की तरफ तो यही आसान रहता है। हल्के हाथ से, धीरे-धीरे, और मरीज को बैठाकर हाथ ढीला छोड़वाकर।

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