100% प्राकृतिक · आयुर्वेदिक · भारत में बना

जोड़ों के दर्द का तेल

जोड़ों का दर्द धीरे-धीरे आता है। पहले सिर्फ सुबह की अकड़न, जो थोड़ा चलने पर ठीक हो जाती है। फिर सीढ़ियां। फिर ठंड के दिनों में उंगलियां। ज्यादातर लोग इसे उम्र मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन रोज की एक छोटी दिनचर्या से इसमें काफी फर्क पड़ता है। यहां वही दिनचर्या दी गई है।

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Dr. Granny's Magic™ आयुर्वेदिक तेल — जोड़ों का दर्द के लिए
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जोड़ों का दर्द — छोटा जवाब

जोड़ों के दर्द के लिए Dr. Granny's Magic की 5–10 ml मात्रा हथेलियों में गर्म करके प्रभावित जोड़ पर 3–5 मिनट तक हल्की गोलाकार मालिश करें, दिन में दो से तीन बार। मालिश के बाद उस हिस्से को सूती कपड़े से ढक दें ताकि गर्माहट बनी रहे। इसमें सल्लकी (बोसवेलिया), गुग्गुल और अश्वगंधा तिल तथा सरसों के तेल के आधार के साथ हैं। पूरे भारत में Cash on Delivery — mukorossi.in पर।

भारत में जोड़ों का दर्द

2019 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में लगभग 6 करोड़ 20 लाख लोगों को ऑस्टियोआर्थराइटिस था। 1990 में यह संख्या करीब 2 करोड़ 30 लाख थी। यानी तीस साल में यह लगभग तीन गुना हो गई।

घुटना सबसे ज्यादा प्रभावित जोड़ है। भारत में हुए अध्ययनों में करीब हर पांचवें वयस्क में घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस मिला है। जमीन पर बैठना, उकड़ूं बैठना, सख्त फर्श और लिफ्ट के बिना सीढ़ियां — ये सब घुटने पर ज्यादा बोझ डालते हैं।

ठंड में दर्द क्यों बढ़ जाता है

ठंड में जोड़ के आसपास का खून का बहाव कम हो जाता है और मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। जोड़ के अंदर का चिकनाई वाला द्रव भी गाढ़ा हो जाता है। इसी वजह से सर्दियों में अकड़न ज्यादा महसूस होती है और सुबह उठना मुश्किल लगता है।

गर्म तेल की मालिश इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती है — पहले गर्माहट, फिर हरकत।

कौन सी जड़ी-बूटियां और क्यों

आयुर्वेद में जोड़ों की तकलीफ के लिए सल्लकी यानी बोसवेलिया और गुग्गुल सबसे प्रमुख हैं। इनके साथ अश्वगंधा, हरजोड़, रास्ना और दशमूल पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होते हैं।

गर्माहट देने वाले तत्व — कपूर, सोंठ, हल्दी, अजवाइन और सरसों — मालिश के समय वह गर्म एहसास देते हैं जिसे लोग बताते हैं कि जोड़ अब खुल रहा है। Dr. Granny's Magic में 25 से ज्यादा ऐसी शास्त्रीय जड़ी-बूटियां तिल और सरसों के तेल के आधार में हैं।

किन जोड़ों पर लगा सकते हैं

यह तेल शरीर के किसी भी जोड़ पर बाहरी रूप से लगाया जा सकता है। मात्रा जोड़ के आकार के हिसाब से रखें — उंगलियों के लिए कुछ बूंदें काफी हैं, घुटने या कूल्हे के लिए ज्यादा।

  • घुटने — गोलाकार मालिश, घुटने की हड्डी के चारों तरफ
  • उंगलियां और कलाई — हल्के हाथ से, एक-एक उंगली
  • कंधा — सामने, ऊपर और बाहरी बांह की तरफ
  • टखना और एड़ी — नीचे से ऊपर की तरफ
  • कूल्हा — बगल और पीछे की मांसपेशियों पर

जोड़ों पर तेल लगाने का तरीका

  1. 1

    आराम से बैठ जाएं और जिस जोड़ पर मालिश करनी है उसे सहारा दे दें। हवा में लटका हुआ हाथ या पैर तना रहता है।

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    5–10 ml तेल हथेलियों में लेकर रगड़कर गर्म करें, या कटोरी को एक मिनट गर्म पानी में रख दें।

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    पहले पूरे जोड़ पर तेल फैला लें, फिर धीरे-धीरे गोलाकार मालिश शुरू करें। जोर न लगाएं।

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    जोड़ के ऊपर सीधा दबाव डालने से बचें — उसके आसपास की मांसपेशियों पर काम करें।

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    3 से 5 मिनट मालिश करें, फिर उस हिस्से को सूती कपड़े से ढककर दो मिनट छोड़ दें।

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    दूसरी तरफ के जोड़ पर भी लगाएं, चाहे दर्द एक ही तरफ हो। दूसरा जोड़ ज्यादा बोझ उठा रहा होता है।

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    दिन में दो से तीन बार — सुबह उठने से पहले, शाम को और रात सोने से पहले।

केवल बाहरी उपयोग के लिए। संवेदनशील त्वचा हो तो पहली बार से पहले कलाई पर थोड़ा लगाकर देख लें।

बोतल में क्या है

तिल और सरसों के तेल के आधार में शास्त्रीय आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां।

Eucalyptus Oil (Nilgiri Tel)

Contains 1,8-cineole, studied for its cooling sensation and ability to ease the perception of muscle and joint discomfort when applied topically.

Sesame Oil (Til Tel)

Classical Ayurvedic carrier oil. Research suggests topical sesame oil massage may help reduce the severity of pain in limb trauma and support skin nourishment.

Smilax China (Chob Chini)

Traditionally used in Ayurveda for joint comfort. Phytochemical studies show anti-inflammatory and antioxidant activity attributed to its steroidal saponins.

Ashwagandha (Withania somnifera)

Adaptogenic herb with documented anti-inflammatory properties. Clinical reviews support its use for easing joint stiffness and improving musculoskeletal comfort.

Neem Oil

Rich in nimbidin and fatty acids. Research indicates topical neem may soothe irritated skin and supports its traditional use over sore joints.

Peppermint

Menthol in peppermint oil produces a cooling effect that activates skin TRPM8 receptors, providing fast-acting relief sensation when massaged onto sore muscles.

पूरी सामग्री देखें

डॉक्टर से पहले मिलें अगर

  • जोड़ अचानक सूज गया हो, या गर्म और लाल हो
  • दर्द गिरने, मुड़ने या चोट के बाद शुरू हुआ हो
  • जोड़ बीच में अटक जाता हो या जवाब दे देता हो
  • उस पैर या हाथ पर बोझ न डाल पा रहे हों
  • सूजन के साथ बुखार हो

मालिश का तेल रोज के आराम के लिए है। यह जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है, और किसी रोग की पहचान या इलाज के लिए नहीं है।

आम सवाल

जोड़ों के दर्द के लिए कौन सा आयुर्वेदिक तेल अच्छा है?

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जिसमें सल्लकी (बोसवेलिया) और गुग्गुल हों, और आधार तिल के तेल का हो। Dr. Granny's Magic में इनके साथ अश्वगंधा, हरजोड़, हल्दी और सोंठ भी हैं।

क्या यह गठिया के दर्द में लगाया जा सकता है?

+

यह जोड़ों की रोजमर्रा की अकड़न और तकलीफ में आराम के लिए बाहरी मालिश का तेल है। गठिया की जांच और इलाज आपके डॉक्टर का काम है — डॉक्टर की दी हुई दवा जारी रखें।

दिन में कितनी बार लगाना चाहिए?

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दो से तीन बार। ठंड के मौसम में या पुराने दर्द में तीन बार ज्यादा फायदेमंद लगता है। मात्रा से ज्यादा नियमितता मायने रखती है।

क्या बुजुर्ग रोज लगा सकते हैं?

+

हां। यह बुजुर्गों की पतली त्वचा के लिए भी सौम्य है और जलन नहीं करता। घर का कोई सदस्य भी आसानी से लगा सकता है।

क्या तेल घिसे हुए कार्टिलेज को ठीक करता है?

+

नहीं। बाहरी मालिश गर्माहट, आराम और रोज की हरकत में मदद करती है। कार्टिलेज की स्थिति के बारे में हड्डी के डॉक्टर से बात करें।

क्या इसकी गंध तेज है?

+

गंध गर्म और जड़ी-बूटियों वाली है, दवा जैसी तेज नहीं। सोखने के बाद कपड़ों पर नहीं रहती।

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